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राम को चौदह वर्ष का वनवास

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राजपुर/देहरादून। श्री आदर्श रामलीला ट्रस्ट राजपुर के प्रधान एडवोकेट योगेश अग्रवाल ने जानकारी देते हुये बताया की श्री आदर्श रामलीला ट्रस्ट राजपुर द्वारा आज श्रीराम सीता विवाह के बाद अपनी वृद्धावस्था और कुमार राम की योग्यता देखकर कुल गुरु वशिष्ठ जी से आशीर्वाद प्राप्त कर राम को अयोध्या का राजा बनाने की घोषणा की।

इस घोषणा की मुनादी सुनकर महारानी कैकेई की दासी मंथरा द्वारा कैकेई को राम के विरुद्ध तैयार कर लिया। परिणाम स्वरूप जहां अयोध्या में एक ओर खुशियां मनाई जा रही थी वहीं दूसरी ओर कैकेई कोपभवन में महाराज दशरथ की प्रतीक्षा कर रही थी। खुशी के वातावरण में कैकेई की अनुपस्थिति देखकर महाराजा दशरथ को भी कोप भवन जाना ही पड़ा, जहां कैकेई ने पुराने वचनों का वास्ता देकर अपने दो वरदान मांग लिये, जिसके अनुसार पहले वरदान में राम को चौदह वर्ष का वनवास तथा दूसरे वरदान में भरत को अयोध्या का राज मांग लिया।

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विवश हुए महाराजा दशरथ ने अत्यंत दुखी स्थिति में राम को वनगमन की आज्ञा देनी ही पड़ी। राम के साथ वन में धर्मपत्नी सीता और अनुज लक्ष्मण भी वन को गये। महामंत्री सूमंत को यह कहकर राम के साथ महाराज दशरथ ने भेजा कि मेरे दोनों पुत्रों की जोड़ी को आस पास के वन तक घुमा फिरा कर शीघ्र ही। वापिस ले आना, सुमंत,यह कर महाराज दशरथ मूर्छित हो गये। भरत और शत्रुघ्न भरत के साथ भरत के नौनिहाल में गये थे।

श्रीराम वनगमन की लीला में महाराज दशरथ (चरण सिंह) तथा कैकेई (संगीत) के जीवंत  गीत, संगीत, चौपाई और हृदय स्पर्शी संवादों ने सभी का मन जीत लिया।वहीं राम (उपदेश भारती) तथा लक्ष्मण (गणेश भारती ) की अभिनय कला देखकर श्रृद्धालू दर्शक तालियां बजाकर खुशी का अहसास करवाते रहे।

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