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भारतीय संस्कृति समग्रता की संस्कृति : स्वामी चिदानन्द सरस्वती

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ऋषिकेश, 30 दिसम्बर। आज परमार्थ निकेेतन में गुरुमाँ आनंदमूर्ति पहुंची, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, गुरुमाँ आनंदमूर्ति और अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव जीवा साध्वी भगवती सरस्वती की दिव्य भेंटवार्ता हुई। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि इस समय पूरे भारत में श्रीराम मन्दिर निर्माण व उद्घाटन का अपार उत्साह है। वास्तव में यह केवल श्रीराम मन्दिर नहीं बल्कि राष्ट्र मन्दिर है और वह जिस दिव्यता व भव्यता के साथ निर्मित हो रहा है उसके लिये चारों ओर लोगों की आस्था व उत्साह देखते ही बनता है, सनातन की यह ज्योति सभी को प्रकाशित करती रहे। स्वामी जी ने कहा कि भारत के ऊर्जावान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लोगों के दिन ही नहीं बल्कि दिल भी बदल रहे हैं। मोदी जी के नेतृत्व में अनेक मंदिरों का ऐतिहासिक स्तर पर कायाकल्प हुआ। काशी कॉरिडोर से लेकर महाकाल कॉरिडोर तक, कई मंदिरों का जीर्णोद्धार हुआ और कई मन्दिरों की भव्यता व दिव्यता को पुनर्स्थापित किया; केदारनाथ धाम का कायाकल्प किया वास्तव में यह समय भारतीय संस्कृति को पुनर्स्थापित करने का है। वर्तमान समय में भारत में सरकारी नहीं बल्कि संस्कारी सरकार है। इस समय राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आस्था के आधार पर अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहा है। सभी को मिलकर सामाजिक समरसता अर्थात् सारे भेदभाव व अस्पृश्यता को जड़ से समाप्त कर प्रेम व सौहार्द्र को बनाने रखने हेतु कार्य करना होगा। भारत का सौभाग्य है कि हमारे पास कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रूप में सशक्त प्रधानमंत्री और विकास के नायक हैं। वे आत्मविश्वास, आत्मबल और संकल्पों से भरे हुये आध्यात्मिक पुरोधा है। जो गांव, गंगा और राष्ट्र के लिये समर्पित और संकल्पित है। वे सबका साथ, सबका विकास, सतत और सुरक्षित विकास! साफ नियत और सही विकास के नायक है। मोदी जी कर्मयोगी हैं और वे भारत ही नहीं पूरे विश्व को एक नई ऊर्जा प्रदान कर रहे है। वे पद, प्रतिष्ठा, के लिये नहीं बल्कि निष्ठा के साथ कार्य करते हुये राष्ट्र सेवा को समर्पित जीवन जी रहे है। उनका हर फैसला साहसिक और दूरगामी परिणाम वाला होता है और वे स्वयं भी सदैव राष्ट्र हित के लिये समर्पित रहते है और हमारे युवाओं को भी यही संदेश दे रहे हैं। उनके नेतृत्व में हमारा राष्ट्र अखंड भारत के साथ-साथ आत्मनिर्भर, स्वच्छ, सुन्दर, समृद्ध और समुन्नत भारत बनने की दिशा में अग्रसर हो रहा है। अब सभी को मिलकर पर्यावरण संरक्षण के लिये कार्य करना होगा। स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति समग्रता की संस्कृति है और वेद, भारतीय संस्कृति के आध्यात्मिक, सामाजिक व मनोवैज्ञानिक आधार है। धार्मिक संगठन सामाजिक शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वसुधैव कुटुम्बकम् का दिव्य सूत्र समृद्ध समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है इन्हीें दिव्य सूत्रों से युवा पीढ़ी को अवगत करना जरूरी है। स्वामी जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी ने गुरुमाँ आनंदमूर्ति जी को रूद्राक्ष का पौधा माँ गंगा के आशीर्वाद स्वरूप भेंट किया।

 

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