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महक क्रांति नीति पर तेज़ी से काम, 22,750 हेक्टेयर में विकसित होंगी 7 एरोमा वैली: कृषि मंत्री

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देहरादून, 17 जुलाई। प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने शुक्रवार को महक क्रांति नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में सगंध पौध केंद्र द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए मंत्री ने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्यों को आगे बढ़ाने और किसानों के उत्पादों के बेहतर विपणन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि महक क्रांति नीति के तहत राज्य के विभिन्न जनपदों में 22,750 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 7 एरोमा वैली विकसित की जाएंगी। इनमें चमोली एवं अल्मोड़ा में डैमस्क रोज वैली, पिथौरागढ़ में तिमूर वैली, ऊधमसिंह नगर में मिंट वैली, चम्पावत एवं नैनीताल में सिनेमन (दालचीनी) वैली तथा हरिद्वार एवं पौड़ी में लेमनग्रास वैली विकसित की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना से लगभग 91 हजार किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। अधिकारियों ने बताया कि चमोली और अल्मोड़ा में 2,000 हेक्टेयर में डैमस्क गुलाब, पिथौरागढ़ के मुनस्यारी एवं बिण क्षेत्र में 5,150 हेक्टेयर में तिमूर, चम्पावत एवं नैनीताल में 5,200 हेक्टेयर में दालचीनी, हरिद्वार, देहरादून एवं पौड़ी में 2,400 हेक्टेयर में लेमनग्रास तथा ऊधमसिंह नगर एवं हरिद्वार में 8,000 हेक्टेयर में मिंट की खेती विकसित की जाएगी। इन परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।
बैठक में बताया गया कि नीति के अंतर्गत किसानों को नर्सरी विकास, कृषिकरण एवं संस्थापन लागत पर 50 से 80 प्रतिशत तक अनुदान, प्रसंस्करण सुविधाओं पर 80 प्रतिशत अनुदान तथा मार्केटिंग, ब्रांडिंग और पैकेजिंग सामग्री पर भी 80 प्रतिशत तक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और अधिक आय सुनिश्चित हो सके।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि महक क्रांति नीति का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में राज्य में सगंध फसलों का वार्षिक कारोबार 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,179 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि इस योजना से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, युवाओं के पलायन पर अंकुश लगेगा तथा सगंध फसलें किसानों के लिए लाभकारी वैकल्पिक नकदी फसल के रूप में स्थापित होंगी। बैठक में किसानों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के लिए अल्मोड़ा के ताकुला, चमोली के परसारी एवं बिसाड़, चम्पावत के खतेड़ा तथा उत्तरकाशी के रैथल में सैटेलाइट सेंटर विकसित करने की जानकारी भी दी गई। इन केंद्रों पर इत्र एवं सगंध उद्यान विकसित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश में एरोमा टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सगंध उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सगंध उत्पादों को बड़े निजी होटलों और अन्य प्रतिष्ठानों तक पहुंचाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि किसानों को बेहतर बाजार और अधिक आर्थिक लाभ मिल सके।
इस अवसर पर निदेशक कैप डॉ नृपेंद्र चौहान सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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