बाराकोट (चम्पावत)। विकासखंड बाराकोट में चल रहे छह दिवसीय लड़ीधूरा महोत्सव का देवीरथों के मां लड़ीधूरा धाम पहुंचने और मंदिर की परिक्रमा के साथ भव्य समापन हुआ। अंतिम दिन विभिन्न गांवों से पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ देवीरथ मंदिर पहुंचे, जिनके दर्शन के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। देवीरथों के आगमन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में सराबोर रहा। ग्राम काकड़ का देवीरथ दोपहर 2 बजकर 55 मिनट पर मंदिर पहुंचा, जिसमें डांगर कल्याण सिंह मां कालिका के रूप में सवार थे। इसके बाद दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर ग्राम बाराकोट का देवीरथ पहुंचा। इसमें डांगर गुड्डी देवी भगवती के रूप में तथा प्रताप सिंह मां कालिका के रूप में सवार थे। देवीरथों में सवार डांगरों ने धाम पहुंचे भक्तों को आशीर्वाद दिया। श्रद्धालुओं ने मां लड़ीधूरा सहित अन्य देवी-देवताओं के दर्शन कर परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। लड़ीधूरा शैक्षिक एवं सांस्कृतिक मंच बाराकोट के अध्यक्ष नागेंद्र कुमार जोशी ने बताया कि महोत्सव पिछले 15 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। इसमें क्षेत्रीय जनता और श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण सहयोग रहता है। यह महोत्सव क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक है। समापन पर उन्होंने समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों, क्षेत्रीय जनता और पुलिस प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि सभी के सामूहिक सहयोग से महोत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर नागेंद्र कुमार जोशी, लोकमान सिंह, रमेश जोशी, जगदीश अधिकारी, प्रदीप ढेक, नवीन जोशी, ऋतेश कुमार वर्मा, दुर्गेश जोशी, विनोद सिंह, राजू अधिकारी, दीनू अधिकारी, किशोर जोशी, रजत वर्मा, निहारिका, वैष्णवी, शुभम, नकुल, हिमांशु, सूरज और कौस्तुभ सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
