नई दिल्ली। भारतीय नौसेना के पहले प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के जहाज-आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता और भारतीय तटरक्षक जहाज सारथी श्रीलंका के कोलंबो पहुँचे। श्रीलंका नौसेना ने नौसैनिक बैंड की मौजूदगी में इन जहाजों का औपचारिक स्वागत किया, जिसके साथ ही इस ‘पोर्ट कॉल’ (बंदरगाह पर रुकने) की शुरुआत हुई। यह यात्रा दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर बातचीत का अवसर प्रदान करती है, साथ ही पहले प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के साथ प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षुओं के साथ जुड़ने का मौका भी देती है। यहाँ पहुँचने पर, नौसैनिक प्रशिक्षण के महानिदेशक और श्रीलंका नौसेना के पूर्वी नौसैनिक क्षेत्र के कमांडर ने जहाजों पर मौजूद प्रशिक्षुओं से बातचीत की। इस बातचीत के जरिए उन्हें प्रशिक्षुओं से जुड़ने और पेशेवर नौसैनिक प्रशिक्षण के बारे में अपने विचार साझा करने का अवसर मिला। इस ‘पोर्ट कॉल’ के दौरान, दोनों नौसेनाओं के कर्मी कई पेशेवर और प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियों में हिस्सा लेंगे, जिनमें ‘क्रॉस-ट्रेनिंग’ (एक-दूसरे के यहाँ जाकर प्रशिक्षण लेना) और ‘पैसेज एक्सरसाइज’ शामिल हैं। इन गतिविधियों से कर्मियों को पेशेवर ज्ञान साझा करने और एक-दूसरे की कार्यप्रणालियों व प्रक्रियाओं को समझने का मौका मिलेगा। साथ ही, इससे दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ बढ़ेगी और तालमेल मजबूत होगा। इस दौरान आम जनता के लिए सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम और जहाजों के दौरे भी आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों से स्थानीय समुदाय के साथ बातचीत करने और भारतीय नौसेना के जहाजों व प्रशिक्षण गतिविधियों को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। यह ‘पोर्ट कॉल’ भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चली आ रही समुद्री साझेदारी को दर्शाता है, और पेशेवर सहयोग के प्रति दोनों नौसेनाओं की निरंतर प्रतिबद्धता को दिखाता है। यह यात्रा भारत के ‘महासागर’ विजन के अनुरूप भी है, जो समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय समृद्धि के लिए आपसी सहयोग और मिलकर काम करने पर जोर देता है।
