नई दिल्ली: ‘IEEE दिल्ली सेक्शन’ के स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर राजधानी के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान ‘भारती विद्यापीठ इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशंस एंड मैनेजमेंट’ (BVICAM) में एक विशेष विशेषज्ञ सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पिछले पांच दशकों की तकनीकी प्रगति पर आत्ममंथन किया गया। इस सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रख्यात कंप्यूटर वैज्ञानिक प्रो. डी. के. लोबियाल ने शिरकत की। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विभिन्न संस्थानों से आए शोधकर्ताओं, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को एक बौद्धिक समागम में बदल दिया।

उल्लेखनीय है कि 13 मई, 1976 को स्थापित IEEE दिल्ली सेक्शन आज भारत के इंजीनियरों और प्रौद्योगिकीविदों के सबसे बड़े और सक्रिय संस्थान के रुप में अपनी पहचान बना चुका है, जो हजारों शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व करता है।

अपने संबोधन में प्रो. डी. के. लोबियाल ने रोजगार के बदलते स्वरूप और करियर के अवसरों पर तकनीकी प्रगति के गहरे प्रभाव का विस्तार से विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि आज हम एक ऐसे युग में हैं जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और डिजिटल क्रांतियों ने कुशल पेशेवरों के लिए अनेक रास्ते खोले हैं, लेकिन साथ ही इसने भविष्य की अनिश्चितता को लेकर युवाओं में एक डर भी पैदा किया है। प्रो. लोबियाल ने विद्यार्थियों को चेतावनी देते हुए कहा कि केवल तकनीक का उपभोक्ता बनना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने वैचारिक समझ, व्यावहारिक कौशल और अनुकूलन क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई एक शक्तिशाली उपकरण तो है, लेकिन यह मानवीय रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और दृढ़ता का स्थान कभी नहीं ले सकता। छात्रों को एआई पर अत्यधिक निर्भर होने के बजाय अपने ज्ञान को निरंतर अपग्रेड करने और कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे IEEE दिल्ली सेक्शन के अध्यक्ष और BVICAM के निदेशक, प्रो. एम. एन. हुडा ने डिजिटल युग में गंभीरता और रणनीतिक तैयारी की आवश्यकता को रेखांकित किया। युवा पेशेवरों को संबोधित करते हुए उन्होंने एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया और कहा कि उन छात्रों के लिए रोजगार के अवसर निरंतर बढ़ रहे हैं जो सक्रिय हैं और सही समय पर अवसरों को पहचानने की क्षमता रखते हैं। प्रो. हुडा के अनुसार, उन विद्यार्थियों की नौकरियां पूरी तरह सुरक्षित हैं जो तकनीकी तौर पर स्वयं को दक्ष बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बदलता तकनीकी परिदृश्य उन्हीं को पुरस्कृत करता है जो तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ अनुशासन और मजबूत कार्य नैतिकता का मेल बिठाते हैं।
स्वर्ण जयंती को उत्सव और चिंतन का क्षण बताते हुए प्रो. हुडा ने संबोधन में कहा कि IEEE दिल्ली सेक्शन के हर सदस्य को इस 50 वर्ष की गौरवशाली यात्रा पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता, पेशेवर उन्नति और सार्थक सामाजिक सेवा के प्रति निरंतर प्रयास ही इस यात्रा की पहचान रहे हैं। उन्होंने पेशेवरों और भविष्य के प्रौद्योगिकीविदों से आह्वान किया कि वे मानवता के लाभ के लिए तकनीक विकसित करना जारी रखें और नवाचार की सीमाओं को और आगे बढ़ाएं। यह सेक्शन अब शोधकर्ताओं, शिक्षकों और नवाचारियों का एक जीवंत और विविध समुदाय बन चुका है जो वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान रखता है।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. हुडा ने स्वर्ण जयंती समारोह समिति के योगदान की सराहना की, जिसमें प्रो. दमन देव सूद (अध्यक्ष), डॉ. राखी, प्रो. सिमरनजीत सिंह और श्री रमणीक कालरा शामिल हैं।
