नई दिल्ली। “आदर्श परिस्थितियों का इंतजार मत कीजिए। फिल्म बनानी है तो बनाइए-जरूरत पड़े तो मोबाइल कैमरे से शुरुआत कीजिए।” 72वें National Film Awards में अपनी संथाली फिल्म आंगेन (Angen) के लिए Best Debut Film of a Director के सम्मान के लिए चुने गए झारखंड के युवा फिल्मकार रवि राज मुर्मू ने शनिवार को दिल्ली में युवा फिल्मकारों से अपनी भाषा, संस्कृति और समुदाय के बीच मौजूद कहानियों को फिल्मों में तलाशने की अपील की। National Film Awards का समारोह 22 सितंबर को गुजरात के केवड़िया में आयोजित होना है।
रवि राज मुर्मू New Delhi Film Foundation (NDFF) के Talk Cinema On The Floor (TCOTF) के सितंबर चैप्टर में ‘Spotlight’ सत्र के लिए ऑनलाइन जुड़े। संथाली भाषा में फिल्म बनाने और सीमित संसाधनों के बावजूद आंगेन को राष्ट्रीय पहचान तक पहुंचाने की उनकी यात्रा इस सत्र का प्रमुख आकर्षण रही।

रवि राज ने बताया कि क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति पर फिल्म बनाने की अपनी अलग चुनौतियां होती हैं, लेकिन अपनी community के बीच काम करने की एक बड़ी ताकत यह भी है कि लोग और सहयोगी लगातार जुड़ते चले जाते हैं। उन्होंने बताया कि Angen लगभग शून्य बजट और बेहद सीमित संसाधनों में बनाई गई। उन्होंने युवा फिल्मकारों को प्रेरित करते हुए कहा कि फिल्म बनाने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। काम शुरू करने पर गलतियां भी होंगी, लेकिन उन्हीं गलतियों से सीखते हुए फिल्मकार अपने काम को बेहतर बना सकता है।

उन्होंने दर्शकों के सवालों के जवाब भी दिए और उन्हें अपनी क्षेत्रीय भाषा, स्थानीय संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ी कहानियों को तलाशने तथा उन्हें रचनात्मक रूप से फिल्मों में बदलने के लिए प्रेरित किया। रवि राज ने कहा कि अपनी community के साथ काम करने से न केवल कहानियां मिलती हैं, बल्कि फिल्म बनाने के लिए सहयोग और संसाधन भी धीरे-धीरे जुटते जाते हैं।
रवि राज से बातचीत से पहले TCOTF की शुरुआत होस्ट निवृति खत्री और पुनीत शर्मा ने की। इसके बाद NDFF के संस्थापक एवं महासचिव आशीष के. सिंह ने Talk Cinema On The Floor और New Delhi Film Foundation के विज़न और उद्देश्य पर बात की। उन्होंने कहा कि TCOTF का उद्देश्य सिनेमा को सिर्फ देखने तक सीमित न रखकर उसे समझने, उस पर बातचीत करने, सवाल पूछने, सीखने और नए रचनात्मक सहयोग की संभावनाएं तलाशने का मंच तैयार करना है। इसके बाद प्रतिभागियों ने अपना संक्षिप्त परिचय दिया और तीन सत्रों की शुरुआत हुई।

पहला सत्र ‘Craft & Crew’ लेखक और स्क्रीनराइटर शिरीष शर्मा के साथ हुआ। FTII, पुणे से प्रशिक्षित शिरीष शर्मा 12 फीचर फिल्मों के लेखक हैं, जिनमें भैयाजी सुपरहिट और माज़ी शामिल हैं। उन्होंने ‘पहली कहानी से पहली पटकथा’ पर बातचीत करते हुए कहा कि लेखक की पहली कहानी अक्सर उसके निजी अनुभवों या आपबीती के आसपास बुनी होती है। उनके अनुसार कहानी का premise तय करते समय ऐसे character को पकड़ना जरूरी है जो कहानी को आगे ले जा सके और परिस्थितियों से संघर्ष कर सके। तभी कहानी का आरंभ, मध्य और अंत स्वाभाविक रूप से विकसित होता है।
शिरीष ने लेखन में लेखक की अपनी पीड़ा और अनुभव की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक लेखक किसी तकलीफ या संघर्ष से नहीं गुजरता, उसके लेखन में वह गहराई आना मुश्किल है। उन्होंने युवा लेखकों से कहा कि लिखते समय atmosphere, character और conflict को लेकर स्पष्टता जरूरी है। उनके अनुसार “लिखने में बात से बात बनती है”– एक-एक character के साथ परिस्थिति और उसकी चुनौती को सामने रखते हुए कहानी आगे बढ़ती है और फिर उसका climax तथा resolution अपने आप धीरे-धीरे सामने आता जाता है।

TCOTF के नए ‘Music Chapter’ की शुरुआत सितंबर के Artist of the Month, Bodh के साथ हुई। उभरते singer और music producer Bodh हाल ही में Senorita के अपने हरियाणवी अंदाज के वीडियो के जरिए सोशल मीडिया पर चर्चा में आए। उन्होंने अपनी संगीत यात्रा साझा करते हुए बताया कि वायरल हुआ यह वीडियो भी लगभग खेल-खेल में तैयार हो गया था। Bodh ने अपनी कई नई compositions भी सुनाईं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा। वह जल्द ही अपना music album लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं।
कार्यक्रम के आयोजन और संचालन में NDFF की ओर से हरिंदर कुमार, वैभव मैत्रेय और कृश गुप्ता ने प्रमुख भूमिका निभाई। कार्यक्रम का समापन नेटवर्किंग टी और प्रतिभागियों के बीच अनौपचारिक बातचीत के साथ हुआ।
