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‘‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’’ के तहत राजभवन में आयोजित हुआ कार्यक्रम

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देहरादून 01 मई। गुरुवार को राजभवन ऑडिटोरियम में गुजरात और महाराष्ट्र राज्य स्थापना दिवस मनाया गया। ‘‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’’ के तहत राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने सभी उत्तराखण्ड वासियों की ओर से गुजरात और महाराष्ट्र वासियों को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर इन दोनों ही प्रदेशों के लोगों द्वारा लोक गीत एवं लोक नृत्य के साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि गुजरात एवं महाराष्ट्र इन दोनों ही राज्यों का गौरवमयी इतिहास है और इनकी समृद्ध संस्कृति एवं जीवन्त परंपराएं हमारे राष्ट्र का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि कर्मठ लोगों की भूमि, गुजरात ने सर्वांगीण प्रगति के साथ-साथ अपनी अनूठी संस्कृति के कारण अपनी छाप छोड़ी है। जबकि महाराष्ट्र आधुनिक भारत के औद्योगिक विकास की धुरी रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन में भी इन राज्यों के निवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और वर्तमान में भारत की प्रगति में अपना अद्वितीय योगदान कर रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि आज का यह अवसर केवल दो राज्यों के गठन का स्मरण भर नहीं है, बल्कि यह भारत की विविधता, समरसता और संघीय ढांचे की सजीव अभिव्यक्ति है। उन्होंने आह्वान किया कि हम संघीय एकता और सांस्कृतिक विविधता की उस भावना को और मजबूत करें, जिसके बल पर हमारा भारत एकजुट है। राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल जी का योगदान भुलाया नहीं जा सकता। सरदार पटेल ही वह शिल्पी थे जिन्होंने भारत के स्वतंत्र होने के बाद सैकड़ों रियासतों को एक भारत में समाहित कर एक अद्भुत कार्य किया। उन्होंने कहा कि निसन्देह वे केवल लौह पुरुष नहीं थे बल्कि भारत की आत्मा के रक्षक थे। राज्यपाल ने कहा कि आज जब हमारा देश ‘विकसित भारत 2047’ की ओर तेजी से अग्रसर है, तब प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र सर्वोपरि की भावना से संकल्पित होकर राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनना होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी का ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का मंत्र हमें यही सिखाता है कि देश की प्रगति सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। राज्यपाल ने गुजरात समाज देहरादून एवं महाराष्ट्र मण्डल देहरादून के द्वारा किए जा रहे विभिन्न सामाजिक कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में प्रथम महिला श्रीमती गुरमीत कौर, अपर सचिव श्री राज्यपाल स्वाति एस. भदौरिया, वित्त नियंत्रक डॉ. तृप्ति श्रीवास्तव, डॉ. एम.एन. झा, मिहिर राजगुरु, रविंद्र मेहरा, वसुधा वर्मा, डॉ. एन.आर. पटेल डॉ. निशि भट्ट सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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देहरादून। भारत में अध्यात्म की सुंदरता लुप्त हो रही है जिसे संजोने की जरूरत है, ये बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डा सुनील अंबेकर ने कही। डा अंबेकर देहरादून में विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता के रूप संबोधित कर रहे थे। डा. अंबेकर ने कहा कि भारत को जानने की जरूरत है जिसे आध्यात्म के जरिए ही जाना जा सकता है चिंता की बात ये है कि अध्यात्म की सुंदरता लुप्त हो रही है जिसे संजोने की संरक्षित करने की जरूरत है और इसके लिए अध्यात्म के लिए पुस्तके बड़ी भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों की अपनी जीवन पद्धति है लेकिन भारत की जीवन पद्धति ,भारत की जीवन शैली को अपनी संस्कृति परंपरागत तौर तरीके से रहने की है, यही हमारा व्यवहार है, उन्होंने कहा कि हमे आधुनिक होना चाहिए, अनुसंधान पर भी जाना चाहिए लेकिन नारो में बहना नही चाहिए। उन्होंने कहा कि हम तकनीक से आगे बढ़ते है, हम चांद पर भी पहुंचे है वो भी संघर्ष की यात्रा है,लेकिन हमने उतना ही संघर्ष श्री राम मंदिर के निर्माण के लिए भी किया है, हमने अपनी संस्कृति अपने सनातन को नही छोड़ना है। डा अंबेकर ने कहा कि हिंदुत्व यात्रा का वर्णन हमारे ग्रंथों में है हम सभी को साथ लेकर चलते है, हमे सभ्यता हम संस्कृति की यात्रा हिंदुत्व में ही ढूंढते है, वही सही मार्ग, समानता का मार्ग है। उन्होंने कहा कि हमारे त्यौहार समानता का व्यवहार है जो हमे जोड़ती चली जाती है। उन्होंने कहा कोई जादू नहीं था कि दुनियां ने योग को अपना लिया, योग शुद्धता का भाव लिए हुए था सब के लिए उपयोगी सबके लिए कल्याणकारी भी था ऐसे कई अनुसंधान ऐसे कई विषय है जो विश्व के कल्याणकारी होंगे और अब इसे विश्व स्वीकार कर रहा है। हमारे देश में हजारों लोगों ने राष्ट्र अराधना की है। उन्होंने कहा कि देश में कुछ लोगो को भूलने की आदत है जिन्हे जगाना जरूरी है, जो कल तक ये भूल गए थे कि श्री राम कहां पैदा हुए, हुए भी कि नहीं? आज वही स्मृतियां वापिस आ रही है, कुछ लोग भारत 1947 के बाद के भारत को मानते है लेकिन भारत का इतिहास हजारों साल पुराना है। उन्होंने कहा नया भारत नई पीढ़ी का जरूर है लेकिन इस पीढ़ी को पुराने भारत के विषय में भी बताना जरूरी है। इस अवसर पर विश्व संवाद केंद्र की पत्रिका हिमालय हुंकार के दीपावली विशेषांक का भी विमोचन किया गया। साथ ही पूर्व आईएएस सुरेंद्र सिंह पांगती की पुस्तक साक्षात आदि शक्ति : उग्रावतारा नंदा का भी विमोचन किया गई। श्री रावत ने नंदा देवी के विषय में जानकारी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मेजर जनरल शम्मी सब्बरवाल ने की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुरेंद्र मित्तल ने सभी का आभार प्रकट किया। मंच पर विश्व संवाद केंद्र के निदेशक विजय, पूर्व आईएएस सुरेंद्र पांगती, रंजीत सिंह ज्याला भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रांत मीडिया संवाद प्रमुख बलदेव पाराशर ने किया। कार्यक्रम में प्रांत प्रचारक डा शैलेंद्र, क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम, सह प्रचार प्रमुख संजय, पूर्व राज्यसभा सदस्य तरुण विजय आदि गणमानय व्यक्ति उपस्थित रहे।

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