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पेंशन की मांग को लेकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों का क्रमिक अनशन

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देहरादून, 29 नवंबर। लोक निर्माण विभाग एवं सिंचाई विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी विगत 58 दिनों से अपनी पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं की बहाली की मांग को लेकर यमुना कॉलोनी स्थित लोक निर्माण भवन मे धरने व 48 दिन से क्रमिक अनशन करते हुये आंदोलनरत हैं। आज क्रमिक अनशन पर बचन सिंह मनवाल, उदय सिंह नेगी, अनिल कुमार व अब्दुल कयूम बैठे।
बुजुर्ग कर्मचारी अपनी बुनियादी मांगों के लिए आज भी धरना स्थल पर जमे रहे। सेवानिवृत्त कार्यप्रभारित से नियमित कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष खेमराज सिंह का कहना है कि यह स्थिति बेहद दुखद है, क्योंकि जिन्होंने अपने जीवन के चार दशक राज्य की सड़कों, पुलों और सिंचाई प्रणालियों के निर्माण में समर्पित किए, आज वे स्वयं सिस्टम द्वारा उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि परिवारों से दूर बैठकर अनशन कर रहे इन बुजुर्गों के चेहरे पर गौरव की जगह अब निराशा की गहरी रेखाएं हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारियों का कहना है कि पेंशन न मिलने से उनका जीवन कठिनाई से गुजर रहा है। उन्होंने 30–40 वर्ष सरकार की सेवा की, लेकिन आज उनके पास न तो पेंशन का सहारा है और न ही गोल्डन कार्ड जैसी स्वास्थ्य सुविधा। बीमारी की स्थिति में भी उन्हें अपनी जेब से भारी भरकम खर्च उठाना पड़ रहा है। इस उम्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव जीवन पर सीधा संकट बन गया है। कई कर्मचारी ऐसे भी हैं जिन्हें विभागीय क्वार्टर खाली करने का नोटिस मिला है, लेकिन बिना पेंशन और आय के वे अपने परिवार को लेकर कहां जाएं, यह उन्हें समझ नहीं आ रहा। वे अपनी मांगों को लेकर कई बार शासन स्तर पर वार्ता कर चुके हैं। उन्होंने मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र भेजे, ज्ञापन सौंपे और कई बार बैठक भी की पर परिणाम सिर्फ आश्वासन ही रहा। सेवानिवृत्त कार्यप्रभारित से नियमित कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के सचिव हिकमत नेगी का कहना हैं कि फाइलें विभागों के बीच घूमती रह गईं, लेकिन ठोस निर्णय आज तक नहीं लिया गया। उनका कहना है कि राज्य में अन्य कई श्रेणियों के लोगों को पेंशन मिल चुकी है, तो 20प्रतिशत बचे इन सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आखिर क्यों भटकना पड़ रहा है। कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग पेंशन बहाल करने और गोल्डन कार्ड सुविधा प्रदान करने की है। लोक निर्माण विभाग एवं सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने रिटायर्ड कर्मचारियों की सभी मांगों की संस्तुति शासन को भेज दी है। अब सरकार के निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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