हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत 22 सितंबर, मंगलवार को आकाशवाणी और विश्व हिंदी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आकाशवाणी दिल्ली के भारत रत्न पं. रविशंकर स्टुडियो में आमंत्रित श्रोताओं के समक्ष हिंदी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
प्रति वर्ष हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालयों में इन दिनों 14 सितंबर से हिंदी भाषा के संवर्धन के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाती है। आकाशवाणी स्टुडियो में आयोजित इस कवि सम्मेलन में भाग लेने वाले कवि थे – देवी प्रसाद मिश्र, ऋचा बनर्जी, डॉ मनोज कुमार शुक्ल उपाख्य अभि दा, दिनेश ध्यानी, सुबोध कुमार भारद्वाज, रजनी सैनी, अभिनव भारद्वाज और पार्थसारथि थपलियाल, जिन्होंने संचालन भी किया।

आरंभ में कवियों का सम्मान किया- कार्यक्रम प्रमुख मनीशा जैन ने। सहायक निदेशक कार्यक्रम प्रमोद कुमार वत्स और राम अवतार बैरवा ने भी अतिथियों का स्वागत किया। कवि अभिनव भारद्वाज ने नई पीढ़ी के तेवर वाली कविता भी पढ़ी।

खुशी की तलाश में जिंदगी गुज़र गई
उम्र तो ढल गयी मगर खुशी किधर गयी।…
रजनी सेन ने हिंदी के प्रति अपना भाव इस तरह व्यक्त किया।-
“धीरे-धीरे मन की सारी गांठें खोल रही हूं,
कानों से नहीं हृदय से सुनना,
मैं हिंदी में बोल रही हूं।”
सुबोध भारद्वाज ने अपनी कविता में लयकारी घोलकर अंदाज बदला।
आँधियाँ भी आईं लाखों मगर,
हौसलों ने न झुकना सीखा इधर,
घाव इतिहास के वो भरते गए
देश को वो सदा चमकाते गये।
मनोज कुमार शुक्ल अभि दा ने अपने मंचीय अनुभव को दिखाया। उन्होंने अन्य रचना के साथ राम के आगमन पर खुशी वाली कविता सुनाई।
पलकों से मैं बुहार दूं पथ,
आज राम का,
दिल में जो बसे थे,
सामने आ गए,
राम आ गए, मेरे राम आ गए,
दिनेश ध्यानी की मानवीय संवेदना से सर्वाधिक भावुक करने वाली कवितासुनाई –
कोसी तुमने क्या कर ड़ाला
घर, परिवार ढोर अरू डंगर
सबका बना निवाला
सबको पल में मारा।
विश्व हिंदी परिषद दिल्ली की अध्यक्ष ऋचा बनर्जी ने तूफान कविता सुनाई।
तूफान के थम जाने के बाद
कितना विचित्र लगता है सड़कों से गुजरना पत्तियों के ढेरों को रौंदते हुए चुपचाप चलना…
संचालक पार्थ सारथि थपलियाल के आग्रह पर प्रतिष्ठित हिंदी कवि राम अवतार बैरवा ने भी चंद दोहे सुनाए। पार्थसारथि थपलियाल ने हिंदी पर कविता के बाद कुछ दोहे सुनाए।

विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देवी प्रसाद मिश्र ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालती कविता सुनाई। उन्होंने कहा कि हिंदी को विश्व भाषा बनाना है, इसके लिए सभी भारतीय दत्त चित्त और समर्पण भाव से आगे बढ़ें।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मिश्र ने इस आयोजन में सहभागिता के लिए आकाशवाणी का आभार व्यक्त किया।

(रिपोर्ट -पार्थसारथि थपलियाल)
