जोधपुर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोधपुर वायुसेना स्टेशन में आयोजित तरंग शक्ति 2026 के दूसरे संस्करण के प्रतिभागियों को संबोधित किया। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) द्वारा 12 अक्टूबर तक आयोजित इस बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित सात मित्र देशों (एफएफसी) की वायु सेनाओं के साथ-साथ 32 पर्यवेक्षक देशों ने भाग लिया। रक्षा मंत्री ने भारतीय वायु सेना और अभ्यास के सफल संचालन में शामिल सभी संगठनों और कर्मियों को बधाई देते हुए, भाग लेने वाले देशों का स्वागत किया और पेशेवर समझ और परिचालन सहयोग को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भाग लेने वाली वायु सेनाओं की उपस्थिति ने अभ्यास को महत्वपूर्ण बनाया है और आशा व्यक्त की कि दल बहुमूल्य पेशेवर अंतर्दृष्टि और भारत की क्षमताओं और दृष्टिकोणों की गहरी समझ के साथ लौटेंगे। उन्होंने आधुनिक युद्ध की उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के महत्व पर जोर दिया। सभा को संबोधित करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में गहरा परिवर्तन हो रहा है, जो भूमि, समुद्र और वायु के पारंपरिक क्षेत्रों से परे जाकर अंतरिक्ष, साइबर, विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम और सूचना क्षेत्र तक विस्तारित हो रहा है। उन्होंने समकालीन सैन्य अभियानों को आकार देने में मानवरहित प्रणालियों, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और लंबी दूरी के सटीक हथियारों के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “भविष्य की सैन्य शक्ति का निर्धारण हमारे पास मौजूद सैन्य प्लेटफार्मों की संख्या से कम होगा। यह संवेदन, समझ, निर्णय लेने और कार्रवाई करने की गति से निर्धारित होगी।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गति, सटीकता, सूचना और एकीकरण सैन्य क्षमता के निर्णायक गुण बनकर उभरे हैं। उन्होंने तेजी से बदलते भू-राजनीतिक वातावरण और रक्षा क्षेत्र में तकनीकी प्रगति से जुड़ी अनिश्चितताओं को देखते हुए निरंतर सतर्कता की आवश्यकता पर भी बल दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने उभरती सुरक्षा चुनौतियों के विरुद्ध राष्ट्रीय लचीलेपन को मजबूत करने के महत्व को पहचाना है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय नीति के रूप में अपनाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दीर्घकालिक संघर्षों और अनिश्चितता के दौर में स्वयं को बनाए रखने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास अपने हथियार और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के उत्पादन की क्षमता होनी चाहिए। भारतीय रक्षा बलों के परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के समय सीमित संसाधनों के साथ काम करने वाली भारतीय वायु सेना आधुनिक विमानों, सटीक हथियारों, परिष्कृत सेंसरों, एकीकृत नेटवर्कों और तेजी से उन्नत हो रही स्वदेशी प्रौद्योगिकियों से लैस एक आधुनिक एयरोस्पेस शक्ति के रूप में विकसित हुई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आत्मनिर्भर भारत का अर्थ दुनिया से अलग-थलग रहना नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों के डिजाइन, विकास, निर्माण, रखरखाव और उन्नयन के लिए घरेलू क्षमताओं का विकास करना है। भारत के बढ़ते एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का जिक्र करते हुए, रक्षा मंत्री ने स्वदेशी कार्यक्रमों और प्रणालियों पर प्रकाश डाला, जिनमें तेजस लड़ाकू विमान, ध्रुव, रुद्र, प्रचंड और लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच) जैसे हेलीकॉप्टर, आकाश वायु रक्षा प्रणाली, एईएसए रडार, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और उभरती मानवरहित एवं एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। रक्षा मंत्री ने उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) कार्यक्रम को पांचवीं पीढ़ी की स्टील्थ लड़ाकू विमान तकनीक में महारत हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और उन्नत एयरो-इंजन विकास और सह-उत्पादन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अनुसंधान, सह-विकास, सह-उत्पादन, रखरखाव, प्रशिक्षण और नवाचार में समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग तलाशने के लिए उत्सुक है। विश्वसनीय साझेदारी और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “भविष्य के रक्षा संबंध केवल प्लेटफार्मों के बारे में नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी और विश्वास के बारे में होंगे।” रक्षा मंत्री ने कहा कि मजबूत स्वदेशी क्षमताओं का निर्माण विश्वसनीय साझेदारों के साथ सार्थक सहयोग के साथ-साथ होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र रूप से कार्य करने में सक्षम होना चाहिए, साथ ही अन्य देशों के साथ प्रभावी ढंग से काम करने में भी सक्षम होना चाहिए जब उनके हित और जिम्मेदारियां आपस में मिलती हों। इस संदर्भ में, रक्षा मंत्री ने क्षमता, प्रौद्योगिकी, अंतरसंचालनीयता और विश्वास के सिद्धांतों को परिचालन अनुभव में रूपांतरित करने में तरंग शक्ति अभ्यास के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अभ्यास ने भाग लेने वाली वायु सेनाओं को एक साथ मिलकर काम करने, परिचालन ज्ञान का आदान-प्रदान करने, प्रक्रियाओं का आकलन करने और मिशन योजना के विभिन्न प्लेटफार्मों, सिद्धांतों और दृष्टिकोणों को समझने का अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि बहुराष्ट्रीय अभ्यासों से वायुसैनिकों और कमांडरों को एक-दूसरे से सीखने, मौजूदा मान्यताओं की जांच करने और अपनी प्रणालियों और प्रक्रियाओं में सुधार के अवसरों की पहचान करने में मदद मिलती है। अभ्यास की भावना का वर्णन करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “विभिन्न राष्ट्र। विभिन्न विमान। विभिन्न अनुभव। लेकिन एक आकाश। यही तरंग शक्ति का संदेश है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अभ्यास का महत्व केवल उड़ानों और अभ्यास किए गए परिदृश्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सहयोगी बलों के साथ प्रभावी ढंग से संवाद करने, समन्वय करने और संचालन करने की क्षमता भी शामिल है। रक्षा मंत्री ने भारतीय वायु सेना से अभ्यास से प्राप्त सीख को अपने प्रशिक्षण, रणनीति, प्रौद्योगिकी, सिद्धांत और भविष्य की क्षमता विकास में शामिल करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रतिभागी राष्ट्र अभ्यास के दौरान विकसित पेशेवर संबंधों और आपसी समझ को आगे बढ़ाते हुए अंतरिक्ष और रक्षा सहयोग के नए रास्ते तलाशेंगे। तरंग शक्ति अभ्यास का दूसरा संस्करण 2024 में आयोजित अपने पहले संस्करण की सफलता पर आधारित है और रचनात्मक रक्षा जुड़ाव और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है। इस अभ्यास में विविध युद्धक, परिवहन, निगरानी और वायु-से-वायु ईंधन भरने की क्षमताओं को एक साथ लाया गया, जिससे संयुक्त मिशन योजना, परिचालन संबंधी ज्ञान और बेहतर अंतर-संचालनीयता के अवसर प्राप्त हुए। हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस और हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (एलसीएच) प्रचंड सहित स्वदेशी प्लेटफार्मों की भागीदारी ने स्वदेशी एयरोस्पेस डिजाइन, इंजीनियरिंग और विनिर्माण में भारत की प्रगति को भी उजागर किया। इस अभ्यास की समकालीन प्रासंगिकता ऑपरेशन सिंदूर में वायु शक्ति की निर्णायक भूमिका से स्पष्ट होती है, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए सटीक, सुनियोजित और प्रभावी अभियानों को अंजाम देने की भारतीय वायु सेना की क्षमता को प्रदर्शित किया। इस ऑपरेशन ने जटिल सुरक्षा परिवेश में परिचालन तत्परता, एकीकृत योजना, विश्वसनीय प्रतिरोध और वायु शक्ति के प्रभावी उपयोग के महत्व को उजागर किया। परिचालन अनुभव से प्राप्त ज्ञान, आधुनिक युद्ध की उभरती चुनौतियों के लिए पेशेवर समझ को बढ़ावा देने और तैयारी करने में तरंग शक्ति जैसे बहुराष्ट्रीय अभ्यासों के महत्व को पुष्ट करता है।हवाई अभियानों के अलावा, इस अभ्यास में पेशेवर गतिविधियाँ, औद्योगिक दौरे और सांस्कृतिक आदान-प्रदान शामिल थे, जिनमें योग सत्र, विरासत स्थलों का दौरा और प्रतिभागी देशों की परंपराओं का जश्न मनाने वाली एक अंतर्राष्ट्रीय रात्रि शामिल थी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, चीफ ऑफ एयर स्टाफ, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, चीफ ऑफ नेवल स्टाफ, एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, अन्य गणमान्य व्यक्ति, रक्षा मंत्रालय के अधिकारी और प्रतिभागी देशों के अधिकारी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।
