रुद्रप्रयाग, 12 अक्टूबर। उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के दिशा-निर्देशन एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण/जनपद न्यायाधीश, रुद्रप्रयाग के मार्गदर्शन तथा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रुद्रप्रयाग श्रीमती पायल सिंह की अध्यक्षता में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर राजकीय इण्टर कॉलेज, भीरी (रुद्रप्रयाग) में विधिक जागरूकता शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को उनके अधिकारों, शिक्षा, सुरक्षा एवं समानता के प्रति जागरूक करना तथा समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना था। इस अवसर पर बालिकाओं को शिक्षा के समान अवसर प्रदान करने, उनके सम्मान एवं सुरक्षा को सुनिश्चित करने तथा बालिकाओं के प्रति होने वाले भेदभाव को समाप्त करने पर जोर दिया गया। सचिव द्वारा अपने संबोधन में बालिकाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने, शिक्षा को प्राथमिकता देने तथा किसी भी प्रकार के अन्याय, शोषण या भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने कहा कि बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा एवं सशक्तीकरण एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है। उन्होंने बाल विवाह एवं कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने तथा बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने में समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही, उन्होंने निःशुल्क विधिक सहायता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए जरूरतमंद एवं पात्र व्यक्तियों से विधिक सेवा संस्थाओं के माध्यम से उपलब्ध सहायता का लाभ उठाने का आह्वान किया। शिविर में बाल विवाह निषेध अधिनियम के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि बाल विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं शैक्षिक विकास को प्रभावित करता है तथा इसे रोकना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके अतिरिक्त, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के बारे में जागरूक करते हुए बच्चों को यौन शोषण से बचाने, उनके साथ होने वाले अनुचित व्यवहार के प्रति सजग रहने तथा ऐसी किसी भी घटना की जानकारी होने पर उचित प्राधिकारी को सूचित करने के महत्व पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के दौरान पैरा लीगल वॉलंटियर्स द्वारा एक प्रभावी*नुक्कड़ नाटक* भी प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई के प्रति जागरूक करते हुए बालिकाओं के जन्म, सम्मान एवं समान अधिकारों का संदेश दिया गया। साथ ही, बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षित रखने के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
