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उत्तराखंड

48 मिनट रहेगा कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त : डॉक्टर आचार्य सुशांत राज

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देहरादून।

डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना/घटस्थापना की जाती है। मां दुर्गा को समर्पित नवरात्रि के त्योहार का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। इस साल नवरात्रि 26 सितंबर सोमवार से शुरू हो रहे हैं, जो कि 4 अक्टूबर तक रहेंगे। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानी 26 सितंबर को घटस्थापना की जाएगी।
उन्होंने बताया की शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 26 सितंबर 2022 से हो रही है। नवरात्रि के पावन पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करके माता को घर के मंदिर में स्थापित किया जाता है। माना जाता है कि यह नौ दिन देवी मां भक्तों के घर पर वास करती हैं।

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इस दौरान लोग नवरात्रि का उपवास करते हैं और देवी के नौ रूपों की आराधना करते हैं। नवरात्रि में भक्त माता के 9 स्वरूपों का श्रृंगार करते हैं। माता को प्रसन्न करने के लिए देवियों के प्रिय नौ रंगों को खुद भी धारण करते हैं। नवरात्रि में नवदुर्गा की पूजा में 9 अलग अलग रंगों का विशेष महत्व है।
डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की शारदीय नवरात्र का समापन 5 अक्टूबर को दशमी तिथि और दशहरे पर्व के साथ होगा। नवरात्रि में देवी के नौ रूप शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री की पूजा की जाती है। प्रथम दिन घटस्थापना होती है और देवी के भक्त देवी के शैलपुत्री रूप की उपासना करते हैं। शास्त्रों में नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व, व्रत और पूजा का विशेष महत्व है।
प्रतिपदा तिथि – प्रतिपदा तिथि 26 सितम्बर को 03:23 एएम बजे से प्रारंभ होगी, जो कि 27 सितम्बर को 03:08 एएम बजे समाप्त होगी।

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घटस्थापना शुभ मुहूर्त –
आश्विन घटस्थापना 26 सितम्बर को
घटस्थापना मुहूर्त – 06:11 ए एम से 07:51 एएम
अवधि – 01 घंटा 40 मिनट
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त – 11:48 ए एम से 12:36 पीएम अवधि – 48 मिनट
ऐसे करें कलश स्थापना:- कलश की स्थापना मंदिर के उत्तर-पूर्व दिशा में करनी चाहिए और मां की चौकी लगा कर कलश को स्थापित करना चाहिए। सबसे पहले उस जगह को गंगाजल छिड़क कर पवित्र कर लें। फिर लकड़ी की चौकी पर लाल रंग से स्वास्तिक बनाकर कलश को स्थापित करें। कलश में आम का पत्ता रखें और इसे जल या गंगाजल भर दें। साथ में एक सुपारी, कुछ सिक्के, दूर्वा, हल्दी की एक गांठ कलश में डालें। कलश के मुख पर एक नारियल लाल वस्त्र से लपेट कर रखें। चावल यानी अक्षत से अष्टदल बनाकर मां दुर्गा की प्रतिमा रखें। इन्हें लाल या गुलाबी चुनरी ओढ़ा दें। कलश स्थापना के साथ अखंड दीपक की स्थापना भी की जाती है। कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की पूजा करें। हाथ में लाल फूल और चावल लेकर मां शैलपुत्री का ध्यान करके मंत्र जाप करें और फूल और चावल मां के चरणों में अर्पित करें। मां शैलपुत्री के लिए जो भोग बनाएं, गाय के घी से बने होने चाहिए। या सिर्फ गाय के घी चढ़ाने से भी बीमारी व संकट से छुटकारा मिलता है।
नवरात्रि के नौ देवियों के प्रिय 9 रंग :-
प्रथम नवरात्रि, माता शैलपुत्री का प्रिय रंग :- प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत होती है। नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। वैसे तो मां दुर्गा को लाल रंग प्रिय है लेकिन देवी के शैलपुत्री की पूजा में सफेद रंग को अति शुभ माना जाता है। मां शैलपुत्री को सफेद रंग पसंद है। उनका स्वरूप भी सफेद रंग की साड़ी पहने नजर आता है। सफेद रंग का शांति और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। यानी नवरात्रि के पहले दिन से शुद्ध और शांत मन से माता की आराधना शुरू की जाती है।
द्वितीय नवरात्रि, माता ब्रह्मचारिणी का प्रिय रंग :- नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। माता ब्रह्मचारिणी की पूजा में लाल रंग का उपयोग करना शुभ माना जाता है। लाल रंग पराक्रम, प्रेम और साहस का प्रतीक होता है। इस दिन माता को लाल चुनरी चढ़ा सकते हैं।
तृतीय नवरात्रि, माता चंद्रघंटा का प्रिय रंग :- शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। माना जाता है कि माता चंद्रघंटा की पूजा के समय नारंगी वस्त्र धारण करने चाहिए। नारंगी रंग सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
चतुर्थी नवरात्रि, माता कुष्मांडा का प्रिय रंग :- नवरात्रि के चौथे दिन देवी के माता कूष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाती है। इस बार गुरुवार को चतुर्थ नवरात्र है। ऐसे में माता कूष्मांडा की आराधना में पीले रंग का उपयोग शुभ माना गया है। पीला रंग उमंग का प्रतीक है। नवरात्रि के चौथे दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
पंचमी नवरात्रि, मां स्कंदमाता का प्रिय रंग :- शारदीय नवरात्रि का पांचवा दिन है। इस दिन माता स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। मां स्कंदमाता की उपासना में हरे रंग का उपयोग कर सकते हैं। हरा रंग ऊर्जा और नवीनीकरण का प्रतीक है।
षष्ठी नवरात्रि, माता कात्यायनी का प्रिय रंग :- शारदीय नवरात्रि के छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा की जाती है। इस बार शनिवार को छठी नवरात्रि है। ऐसे में माता कात्यायनी की आराधना में ग्रे या स्लेटी रंग का इस्तेमाल कर सकते हैं। ग्रे रंग को बुराईयों को नष्ट करने का प्रतीक माना जाता है।
सप्तमी नवरात्रि, माता कालरात्रि का प्रिय रंग :- नवरात्रि का सातवां दिन माता कालरात्रि को समर्पित है। इस दिन नीले रंग के उपयोग को शुभ मानते हैं। नीला रंग निडरता का प्रतीक है। मां कालरात्रि की उपासना करते समय नीले रंग के वस्त्र धारण कर सकते हैं।
अष्टमी नवरात्रि, माता महागौरी का प्रिय रंग :- नवरात्रि की अष्टमी तिथि में मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस बार 3 अक्टूबर 2022, सोमवार को अष्टमी तिथि पड़ रही है। मान्यता है कि महागौरी का जामुनी रंग प्रिय है। इस दिन कन्या पूजन भी होता है। ऐसे में अष्टमी के दिन जामुनी रंग को उपयोग कर सकते हैं।
नवरात्रि की नवमी तिथि, माता सिद्धिदात्री का प्रिय रंग :- शारदीय नवरात्रि का समापन 4 अक्टूबर 2022 को हो रहा है। नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी तिथि को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री ज्ञान की देवी हैं। नवमी पर गुलाबी रंग का प्रयोग कर सकते हैं। गुलाबी रंग नारीत्व का प्रतीक माना जाता है।
शारदीय नवरात्रि की तिथियां :-
प्रथम दिन प्रतिपदा तिथि मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना 26 सितंबर सोमवार
दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी पूजा 27 सितंबर मंगलवार
तीसरा दिन मां चंद्रघण्टा पूजा 28 सितंबर बुधवार
चौथा दिन मां कुष्माण्डा पूजा 29 सितंबर गुरुवार
पांचवां दिन मां स्कंदमाता पूजा 30 सितंबर शुक्रवार
छठा दिन मां कात्यायनी पूजा 1 अक्टूबर शनिवार
सातवां दिन मां कालरात्री पूजा 2 अक्टूबर रविवार
आठवां दिन अष्टमी तिथि मां महागौरी पूजा 3 अक्टूबर सोमवार
नवां दिन नवमी तिथि मां सिद्धरात्री पूजा दुर्गा महानवमी पूजा 4 अक्टूबर मंगलवार
विजया दशमी तिथि दशहरा दुर्गा विसर्जन 5 अक्टूबर बुधवार

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