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श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के कपाट

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चमोली। पंच केदार में चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के कपाट आज सुबह 5:00 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। मंदिर के कपाट खुलते ही मौके पर करीब 200 तीर्थ यात्रियों ने भगवान रुद्रनाथ के दर्शन किए। मुख्य पुजारी वेद प्रकाश भट्ट ने भगवान रुद्रनाथ का जलाभिषेक किया। इस वर्ष मंदिर की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी प्रधान पुजारी वेदप्रकाश भट्ट पर है।

रुद्रनाथ मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के चमोली जिले में स्थित भगवान शिव का एक मन्दिर है जो कि पंचकेदार में से एक है। समुद्रतल से 2290 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर भव्य प्राकृतिक छटा से परिपूर्ण है। रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शंकर के एकानन यानि मुख की पूजा की जाती है, जबकि संपूर्ण शरीर की पूजा नेपाल की राजधानी काठमांडू के पशुपतिनाथ में की जाती है। रुद्रनाथ मंदिर के सामने से दिखाई देती नन्दा देवी और त्रिशूल की हिमाच्छादित चोटियां यहां का आकर्षण बढाती हैं। रुद्रनाथ के कपाट परंपरा के अनुसार खुलते-बंद होते हैं। शीतकाल में छह माह के लिए रुद्रनाथ की गद्दी गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में लाई जाती है जहां पर शीतकाल के दौरान रुद्रनाथ की पूजा होती है।

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देवभूमि उत्तराखंड में पंच केदारों में से एक है रुद्रनाथ। यह दुनियाभर में इकलौता ऐसा शिव मंदिर हैं जहां भगवान शिव के मुख के दर्शन होते हैं। मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने इस स्थान पर पांडवों को अपने मुख के दर्शन दिए थे। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि द्वापर काल में भगवान शिव ने पाण्डवों को यहीं पर अपने मुख के दर्शन दिए थे। यहां पर तभी से भगवान शिव का एकानन रूप के साथ मुखाकृति वाला स्वयंभू शिवलिंग विराजमान हैं। इसके अतिरिक्त नेपाल के पशुपतिनाथ में भगवान शिव के चतुरानन स्वरूप का तथा इंडोनेशिया में पंचानन स्वरूप का शिवलिंग विराजित हैं। पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत युद्ध में अपने ही स्वजनों की हत्या के कारण पांडव गोत्रहत्या के पाप से ग्रसित हो गये थे। गोत्रहत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान श्री कृष्ण ने पाण्ड़वों को भगवान शिव की शरण में जाकर उन्हें प्रसन्न करने की सलाह दी। श्रीकृष्ण की सलाह पर पाण्ड़व शिव के दर्शन के लिए काशी गए।

 

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