देहरादून। नवरात्रि के आखिरी दो दिन अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विधान है। कुछ लोग अष्टमी को कन्या पूजन करते हैं तो कुछ लोग अंतिम दिन नवमी को पूजन करते हैं। कन्या पूजन में कन्याओं को मां का स्वरूप समझकर पूजा की जाती है। कन्याओं को भोजन कराने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। घर में कन्या पूजन करने से सुख, शांति और समृद्धि आती है।
आचार्य सुशांत राज ने बताया कि अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर में 1 बजकर 51 मिनट पर आरंभ होकर अगले दिन 26 मार्च को सुबह में 11 बजकर 49 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, 26 मार्च को चैत्र नरवात्रि की अष्टमी मनाई जाएगी। जो लोग अष्टमी पूजन करते हैं वो इस दिन कन्या पूजन करेंगे।
वहीं, नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च सुबह में 11 बजकर 50 मिनट पर हो रहा है। नवमी तिथि 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 08 मिनट पर समाप्त हो रही है। यहां पर भी उदया तिथि ही देखी जाएगी। ऐसे में चैत्र नवरात्रि का नवमी पूजन 27 मार्च को किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को व्रत और त्योहार मनाने के लिए उत्तम माना जाता है।
अष्टमी तिथि 26 मार्च को 11 बजकर 49 मिनट तक है इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। ऐसे में अष्टमी को जो लोग कन्या पूजा करते हैं उनको 11 बजकर 49 मिनट से पहले तक कन्या पूजन कर लेना चाहिए। जो लोग अष्टमी तिथि का व्रत रखकर नवमी तिथि को कन्या पूजन करते हैं उनको 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 08 मिनट से पहले कन्या पूजन कर लेना चाहिए क्योंकि इसके बाद 10वीं तिथि लग जाएगी।
चैत्र नवरात्रि 26 मार्च को मनाई जाएगी अष्टमी 27 मार्च को नवमी
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