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राज्यपाल ने किया ‘प्रज्ञानम्’ एआई चैटबॉट का लोकार्पण

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देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने बुधवार को लोक भवन में श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ‘प्रज्ञानम्’ एआई चैटबॉट का लोकार्पण किया।
‘प्रज्ञानम्’ एआई चैटबॉट भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह चैटबॉट भारतीय ज्ञान प्रणाली से जुड़े विषयों पर जिज्ञासुओं के प्रश्नों का त्वरित, सटीक एवं संदर्भ आधारित उत्तर प्रदान करने में सक्षम है। इसे विश्वविद्यालय द्वारा ‘वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च’ पहल के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा पर किए गए शोध कार्यों तथा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुत विषयवस्तु के आधार पर विकसित किया गया है।
यह चैटबॉट विशेष रूप से वेद, उपनिषद, पुराण, प्राचीन भारतीय गणित, नाट्यशास्त्र, संगीत, आयुर्वेद, दर्शन एवं भारतीय विज्ञान जैसे विषयों पर आधारित विस्तृत डेटाबेस पर निर्मित है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम नागरिकों को भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित प्रमाणिक जानकारी डिजिटल माध्यम से सरल एवं त्वरित रूप में उपलब्ध कराना है। यह चैटबॉट पर ऑनलाइन उपलब्ध हो गया है, जहां आम नागरिक, विद्यार्थी एवं शोधार्थी इसे आसानी से उपयोग कर सकते हैं।
लोकार्पण कार्यक्रम में राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा वेद, पुराण उपनिषद और प्राचीन सभ्यता में निहित ज्ञान आज भी अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि ‘प्रज्ञानम्’ जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस अमूल्य ज्ञान को 21वीं सदी की आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुँचाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि यह चैटबॉट न केवल जिज्ञासाओं का समाधान करेगा, बल्कि शोध आधारित और प्रमाणिक जानकारी प्रदान कर उपयोगकर्ताओं को भारतीय ज्ञान की गहराई से परिचित कराएगा।
राज्यपाल ने इस परियोजना के लिए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह चैटबॉट एक वर्ष के गहन शोध का परिणाम है। इस दौरान भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित महत्वपूर्ण शोध कार्य किए गए तथा दो पुस्तकों का भी निर्माण किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन आयोजित कर व्यापक विमर्श किया गया, जिससे इस परियोजना को मजबूत आधार मिला।
राज्यपाल ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी तकनीक के साथ अधिक जुड़ी हुई है, ऐसे में ‘प्रज्ञानम्’ उन्हें अपनी जड़ों, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से इस पहल के ‘ब्रांड एंबेसडर’ बनने का आह्वान करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड की इस ज्ञान पहल को वैश्विक स्तर तक पहुँचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। लोकार्पण के अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस चैटबॉट के लिए विश्वविद्यालय को बधाई दी और कहा कि देश-विदेश के विद्यार्थी, शोधकर्ता और सामान्य लोग भारतीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल माध्यम से आसानी से प्राप्त कर पाएंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन. के. जोशी ने ‘प्रज्ञानम्’ चैटबॉट का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया और इसकी कार्यप्रणाली तथा उपयोगिता के बारे में जानकारी साझा की।
लोकार्पण कार्यक्रम को संत समाज तथा शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। कार्यक्रम में सचिव राज्यपाल श्री रविनाथ रामन, विधि परामर्शी श्री कौशल किशोर शुक्ल, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. परविंदर कौशल, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पाण्डेय, उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी, स्वामी जगन्नाथ आश्रम ऋषिकेश के महंत लोकेश दास महाराज, गरीबदासी आश्रम हरिद्वार के स्वामी रविदेव शास्त्री महाराज, चेतन ज्योति आश्रम हरिद्वार के स्वामी शिवानंद महाराज, स्वामी नारायण आश्रम ऋषिकेश के स्वामी नारायण चरण दास महाराज, निर्मल संतपुरा आश्रम हरिद्वार के महंत जगजीत सिंह महाराज, कृष्ण कुंज आश्रम ऋषिकेश के स्वामी गोपालाचार्य महाराज, रामनिवास आश्रम हरिद्वार के स्वामी दिनेश दास महाराज, स्वामी सुतीक्ष्ण मुनि महाराज सहित विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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