देहरादून। भाजपा के द्वारा शुरू किया गया ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान कुछ समझ में नहीं आया। केंद्र में सरकार भाजपा की, उत्तराखंड में सरकार भाजपा की, उत्तर प्रदेश सहित देश के 28 राज्यों में से 22 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी और उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार हैं। उसके बाद भी भाजपा को ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान चलाना पड़ रहा हैं, जिसका मतलब तो यहीं हुआ की कहीं ना कहीं सरकार लोकतंत्र बचाने और अराजकता को काबू करने मे विफल हुई हैं।
जब सरकार में होते हुये भी भाजपा लोकतंत्र नहीं बचा पायी तो फिर लोकतंत्र की रक्षा की उम्मीद वह किस से कर रहीं हैं, क्या विपक्ष से यह उम्मीद की जा रहीं हैं? यदि ऐसा हैं तो सत्ता विपक्ष के हाथों में सौपनी होंगी, तभी तो वह लोकतंत्र की रक्षा कर पायेगा। और जहां तक बात ‘अराजकता हटाओ ’ की हैं तो अराजकता रोकने की जिम्मेदारी भी सरकार की होती हैं। क्या भाजपा यह मान रहीं हैं की उसके राज में अराजकता फ़ैल रहीं हैं ? तभी तो ‘अराजकता हटाओ’ के नारे को लेकर अभियान चलाना पड़ रहा हैं।
