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1676 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है कुंजापुरी देवी मंदिर

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देहरादून।

कुंजापुरी देवी मंदिर हिन्दू धार्मिक, पवित्र एवम् प्राचीन मंदिर है जो कि हिंडोलाखलरोड पर अदली नामक स्थान पर टिहरी गढ़वाल जिले के उत्तराखंड राज्य में स्थित है। कुंजापुरी देवी मंदिर 51 शक्तिपीठ में से है। यह मंदिर टिहरी जिले के 3 शक्ति पीठों में से एक है और इसकी स्थापना जगद्गुरु शंकराचार्य ने की थी। दूसरी 2 शक्ति पीठों में सुरकंडा देवी मंदिर और चंद्रब्रदनी देवी मंदिर हैं। यह मंदिर ऋषिकेश से 25 किलोमीटर की दुरी पर स्थित एवम् मंदिर पहाड़ी पर 1676 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। कुंजापुरी देवी मंदिर टिहरी गढ़वाल जिले में पहाड़ी की चोटी पर स्थित तीन सिद्धपीठों कुंज पूरी, सुरकुंडा देवी और चन्द्रबदनी सिद्ध के त्रिकोण को भी पूर्ण करता है।

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कुंजापुरी देवी मंदिर समुन्द्रतल से 1676 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह मंदिर शिवालिक पहाडियों की 13 सबसे महत्वपूर्ण देवियों में से एक को समर्पित है। कुंजापुरी देवी मंदिर बहुत ही सुंदर रूप से निर्मित किया गया है। यह स्थान प्रसिद्ध सिध्पीठो में से एक माना जाता है। इस मंदिर को सिध्पीठ और कुंजापुरी नाम से इसलिए जाना जाता है क्यूंकि इस स्थान पर देवी सती (भगवान शिव जी की पत्नी) का कुंज भाग गिरा था , जिस कारण इस स्थान का नाम “कुंजापुरी” पड़ा। इस मंदिर की विशेष बात यह है कि कुंजापुरी देवी मंदिर में “भंडारी राजपूत” पुजारी होते है। मन्दिर के मुख्य प्रवेश द्वार जो कि मन्दिर परिसर के समीप स्थित है। उस स्थान पर देवी मां के वाहन “सिंह” तथा “हाथियों” के मस्तक की दो-दो मूर्तियां बनी हुई हैं।

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मुख्य मंदिर ईंट तथा सीमेन्ट का बना हुआ है , जिसकी वास्तुकला शैली आधुनिक मन्दिरों की तरह ही है। मन्दिर के गर्भगृह में देवी की कोई मूर्ति स्थापित नहीं हैं परन्तु अन्दर एक शिलारुप पिण्डी स्थापित है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर देवी का वक्षभाग(कुंज) गिरा था । गर्भगृह में एक शिवलिंग तथा गणेश जी की एक प्रतिमा प्रतिष्ठित है। मन्दिर में निरंतर अखन्ड ज्योति जलती रहती है एवम् मन्दिर परिसर में मुख्य मन्दिर के अलावा एक और भव्य मन्दिर स्थापित है , जिसमें भगवान शिव, भैरों, महाकाली तथा नरसिंह भगवान की भव्य मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर परिसर में “सिरोही” का एक वृक्ष है, जिस पर भक्तगण देवी मां से मन्नत मांगकर चुन्नियां तथा डोरियां बांधते हैं। नवरात्रि के त्यौहार के समय कुंजापुरी देवी मंदिर पर एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है| इस मेले में बड़ी संख्या में भक्त लोग मंदिर पर पूजा-अर्चना करने के लिए आते है।

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