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बाल अधिकारों पर जागरूकता के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

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रुद्रप्रयाग। जनपद में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के तत्वावधान में बाल अधिकारों के प्रति संवेदीकरण एवं व्यापक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उनके समग्र विकास को बढ़ावा देना तथा समाज के विभिन्न वर्गों को इस दिशा में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यशाला में विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों, अधिकारियों, शिक्षकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग कर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए डिवीजन हेड पायल शर्मा ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनके अधिकारों की रक्षा करना केवल सरकार का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाएं और किसी भी प्रकार के शोषण या अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं।
कार्यशाला के दौरान स्वास्थ्य विभाग की प्रतिनिधि डॉ. दीपाली ने बच्चों एवं किशोरों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि नशे की लत बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालती है। उन्होंने इसके दुष्परिणामों के साथ-साथ रोकथाम, परामर्श एवं पुनर्वास से जुड़े महत्वपूर्ण उपायों की भी विस्तृत जानकारी दी और अभिभावकों एवं शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
पुलिस विभाग के साइबर निरीक्षक मनोज चौहान ने वर्तमान डिजिटल युग में साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ठगी एवं अन्य साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बच्चों को इंटरनेट और सोशल मीडिया का सुरक्षित एवं जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने के लिए जागरूक किया। साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने और समय-समय पर मार्गदर्शन देने की सलाह दी।
कार्यक्रम में एडवोकेट अरुण चमोली ने किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) एवं पोक्सो अधिनियम (POCSO Act) के विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि ये कानून बच्चों को शोषण एवं अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन कानूनों की जानकारी आमजन तक पहुंचाना आवश्यक है ताकि जरूरत पड़ने पर उनका प्रभावी उपयोग किया जा सके।
इसी क्रम में श्रम प्रवर्तन अधिकारी रजत मेहता ने बाल श्रम से जुड़े कानूनों एवं उसके दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाल श्रम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने इसके उन्मूलन के लिए सख्त कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेश मिश्रा, शैली प्रजापति, रंजना गैरोला भट्ट सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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