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उत्तम तप धर्म पर भगवान की पूजा अर्चना

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देहरादून, 03 सितंबर। परम पूज्य संस्कार प्रणेता ज्ञानयोगी जीवन आशा हॉस्पिटल प्रेरणा स्तोत्र उत्तराखंड के राजकीय अतिथि आचार्य श्री 108 सौरभ सागर महामुनिराज के मंगल सानिध्य में आज दसलक्षण पर्व का उत्तम तप धर्म पर भगवान की पूजा अर्चना की गयी। पूज्य आचार्य श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि इच्छा का निरोध करना वह तप है। तप चार आराधनाओं में प्रधान है। जैसे स्वर्ण को तपाने से वह समस्त मैल छोड़कर शुद्ध हो जाता है, उसी प्रकार आत्मा भी बारह प्रकार के तपों के प्रभाव से कर्ममल रहित होकर शुद्ध हो जाता है। कर्म निर्जरा के लिए जो तपा जाये वो तप है, तप धर्म कहलाता है। जो सम्बन्ध बनाये जाते है वो दुःखदाई है, बड़ी वस्तु यदि छोटी से आकर्षित होती है तो वह विनाशकारी है। गुरु शिष्य से नहीं, शिष्य गुरु से सम्बन्ध चनायें, यही उत्कृष्टता है। हम दूसरे के गुण व दोष देखते है पर आज का दिन कहता है कि स्वयं के गुण व दोष देखो। पर को देखना छोड़ स्वयं के स्वचुष्टय को प्राप्त करो यही उत्तम तप धर्म है। “संयमितः तप्यते इति तपः” अर्थात् संयम के लिए एवं आचार्य कहते है ‘व्यवस्था नहीं अवस्ता सुधारो, व्यवस्ता अपने आप हो जायेगी।’ एक अवगुण देखने में लगा है उसको गुण नहीं दिखते, एक गुण ही गुण देखने में लगा उसको अवगुण दिखते ही नहीं, एक दुयोंधन की तरह, एक युधिष्ठिर की तरह है पर आज का तप धर्म दोनो से ऊपर उठने की शिक्षा देता है। दूसरों में अच्छाईयाँ देखना सरल है लेकिन अपने में अच्छाई देखना बहुत कठिन है। आनन्द त्याग में नहीं समता में है गरीबी में भी आनन्द नहीं सतोष में आनन्द है। संतोष समता आत्मा का पर्याय है। संयम का दिन इतना कठिन नहीं था सिर्फ आँख झुकाना था ‘सेय’ आए तो देख लेना आशीर्वाद दे देना। लेकिन आज का दिन कहता है कुछ नहीं देखना कौन आया कौन गया, सिर्फ अपने में रहना अपने ज्ञान में रहना, अनंतवार चौका लगाया, भगवान मिले, गुरु मिले लेकिन हम अपना कल्याण नहीं कर पाये, सो के नहीं हो पाया होते ही बने रह गए, इसका कारण क्या है.. उत्तम तप का अभाव।
संध्याकालीन बेला में श्री वर्णी जैन इंटर कॉलेज के वच्चो के द्वारा धार्मिक भजनों पर बहुत सुंदर व भव्य प्रस्तुति दी। जिसमें दीप प्रज्जवलन, मुख्य अतिथि का स्वागत एवं माल्यार्पण प्रबन्धक, अध्यक्ष द्वारा किया गया कार्यक्रम ,नमोकार मन्त्र प्रथम सूर्य है आदि जिनेशवर आदिनाथ भगवान नृत्य प्रस्तुत किए तत्पश्चात मंगलाचरण एवं स्वागत नृत्य , आओ बच्चो मिलकर पाठशाला आना, जैन धर्म को मिलाकर प्री प्रायमरी छात्र-छात्राये, देश मक्ति नृत्य- तेरा हिमालय आकाश फुले बहती रहे गंगा (कक्षा की छात्राये) मंशापूर्ण महावीर स्वामी की स्तुति भजन (कक्षा 10,11 में 12 की छात्रायें) लागी लागी रे लगन प्रभु नाम की प्राईमरी विभाग के छात्र छात्राओं के द्वारा नृत्य प्रस्तुति, नगरी धन्य बनी आज गरबा डॉस (सीनियर सैक्शन छात्रायें), प्रधानाचार्या द्वारा विधालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई,वन्दे भारती भारत वन्दना सिर पर हिमालय का छात्र है। अध्यक्ष, प्रबन्धक, सर्योजक द्वारा अतिथियों का धन्यवाद और आभार व्यक्त किया, चंवर नृत्य, आदि अंत में पुरस्कार वितरण किया गया।
इस अवसर पर विद्यालय प्रबंध कार्यकारिणी उपस्थित रही।
ओर समाज के अंदर गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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