नई दिल्ली, 19 सितंबर : भारती विद्यापीठ इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशंस एंड मैनेजमेंट (बीवीआईसीएएम), नई दिल्ली और जनसंपर्क सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता “जनसंपर्क का बदलता परिदृश्य : पारंपरिक से डिजिटल तक” विषय पर आयोजित विशेष सत्र के दौरान हुआ।

समझौते का उद्देश्य जनसंपर्क, रणनीतिक संचार, पत्रकारिता, मीडिया और डिजिटल संचार के क्षेत्र में शिक्षण संस्थान तथा व्यावसायिक क्षेत्र के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके तहत विद्यार्थियों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन, व्यावहारिक प्रशिक्षण, पेशेवर अनुभव और उद्योग से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के अवसर पर पीआरएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत पाठक, दिल्ली अध्याय की अध्यक्ष प्रो. चारु लता सिंह, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अर्चना कुमारी तथा बीवीआईसीएएम के निदेशक प्रो. एम. एन. हुदा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मंच संचालन समीक्षा किरण तथा आदिति मित्रा। वहीं धन्यवाद ज्ञापन गुरनूर कौर ने किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. एम. एन. हुदा ने शिक्षण संस्थानों और व्यावसायिक क्षेत्र के बीच मजबूत संबंधों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोग विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने और संचार क्षेत्र की बदलती जरूरतों को समझने में मदद करते हैं।
डॉ. अजीत पाठक ने डिजिटल दौर में जनसंपर्क की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर सीखने, नई तकनीकों को समझने तथा विश्वसनीयता, रचनात्मकता और नैतिक संचार को अपने व्यावसायिक जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।
प्रो. चारु लता सिंह ने जनसंपर्क के पारंपरिक स्वरूप से डिजिटल माध्यमों तक हुए बदलावों पर चर्चा की। उन्होंने डिजिटल संचार, रणनीतिक संचार, प्रतिष्ठा प्रबंधन, सामग्री निर्माण और जनसहभागिता की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि माध्यम और तकनीक बदलने के बावजूद जनसंपर्क के क्षेत्र में विश्वास और प्रभावी संवाद का महत्व बना हुआ है।
डॉ. अर्चना कुमारी ने जनसंपर्क के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर चर्चा की। उन्होंने मीडिया निगरानी, जनमत विश्लेषण और सामग्री निर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाओं का उल्लेख किया। साथ ही भ्रामक सूचना, कृत्रिम रूप से तैयार सामग्री, डीपफेक, आवाज की नकल, आंकड़ों की गोपनीयता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ी चुनौतियों पर भी विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित किया।
विद्यार्थियों को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र किया गया प्रदान
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया। इंटर्नशिप पूरी करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र और चेक प्रदान किए गए। इसके अलावा विभिन्न मूल्यवर्धित कार्यशालाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों में सफलतापूर्वक भाग लेने वाले विद्यार्थियों को भी प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। समारोह में 100 से अधिक प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
इस अवसर पर विद्यार्थियों के साथ संवाद भी किया गया। इसमें जनसंपर्क में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका, डिजिटल माध्यमों का प्रभाव, सूचना की विश्वसनीयता, भ्रामक सूचना और संचार के बदलते स्वरूप जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
बीवीआईसीएएम और पीआरएसआई के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर, विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान करना तथा 100 से अधिक विद्यार्थियों का सम्मान कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे। यह समझौता विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और पेशेवर अनुभव उपलब्ध कराने तथा उन्हें बदलते जनसंपर्क और संचार क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
जनसम्पर्क विभाग
भारतीय विद्यापीठ, नई दिल्ली
