नोएडा, 24 अक्टूबर 2026: “फिल्म की समीक्षा में निर्देशक का विज़न सामने आना चाहिए। दर्शकों या पाठकों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि निर्देशक ने अपनी सोच को पर्दे पर कितनी प्रभावी तरह से प्रस्तुत किया है।” यह बात राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव ने New Delhi Film Foundation (NDFF) की पहल Talk Cinema On The Floor (TCOTF) के नोएडा चैप्टर में कही।
24 अक्टूबर को Ravi Sarin Film Institute में आयोजित यह कार्यक्रम TCOTF का पहला नोएडा चैप्टर और दिल्ली से बाहर इस मुहिम का पहला आयोजन था।
पिछले करीब डेढ़ साल से TCOTF हर महीने दिल्ली में आयोजित होता रहा है। इसमें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता फिल्मकारों सहित सिनेमा जगत के प्रतिष्ठित कलाकारों, रचनाकारों और विशेषज्ञों ने भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं। नोएडा में इस पहल का विस्तार दिल्ली-NCR के फिल्म और क्रिएटिव इकोसिस्टम को जोड़ने की दिशा में NDFF का एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम की शुरुआत NDFF के संस्थापक आशीष के सिंह के Founder’s Frame सत्र से हुई। उन्होंने सार्थक सिनेमा, स्वतंत्र फिल्मकारों और कहानी कहने की संवेदनशील दृष्टि को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को देखने, समझने और उसमें संवेदनशीलता विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है। NDFF का प्रयास सार्थक सिनेमा और स्वतंत्र कहानीकारों को प्रोत्साहित करना है।”
कार्यक्रम में फिल्मकार और सिनेमा शिक्षाविद् अशोक ढींगरा ने Craft & Crew: A Masterclass on the Visual Language of Cinema के तहत सिनेमा की दृश्य भाषा के विभिन्न पहलुओं को समझाया। उन्होंने बताया कि पर्दे पर दिखाई देने वाले दृश्य को प्रभावी बनाने में कैमरे के अलावा भी कई कारक भूमिका निभाते हैं। दृश्य की संरचना, फ्रेम में विभिन्न तत्वों का संयोजन और उनके आपसी संबंधों को समझाते हुए उन्होंने फ्रेंच शब्द Mise-en-scène (मीज़ ऑन सीन) की भी व्याख्या की।
Writer’s Word सत्र में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के स्वर्ण कमल से सम्मानित फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव ने फिल्म समीक्षा और आलोचनात्मक दृष्टि पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा की व्यावसायिक फिल्मों के अलावा कम बजट और स्वतंत्र फिल्मों की समीक्षा भी होनी चाहिए, ताकि उनके बारे में जागरूकता और सकारात्मक विमर्श बढ़े। इंटरनेट पर समीक्षाओं की बढ़ती संख्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने दर्शकों को सलाह दी कि वे केवल समीक्षा के आधार पर फिल्म देखने या न देखने का अंतिम फैसला न करें, बल्कि अपनी समझ और नज़रिए से भी फिल्म का मूल्यांकन करें। इस चर्चा में दर्शक के रूप में मौजूद सिनेविद् संदीप पाहवा ने जॉनी मेरा नाम और शोले का उदाहरण देते हुए उन फिल्मों का उल्लेख किया, जिन्हें शुरुआत में समीक्षकों से अपेक्षित सराहना नहीं मिली थी।
My Journey सत्र में फिल्म PR, मीडिया और सेलिब्रिटी मैनेजमेंट से फिल्म निर्माण तक का सफर तय करने वाले हरीश शर्मा ने अपने अनुभव साझा किए। मनोरंजन जगत में 30 से अधिक वर्षों के अनुभव और 400 से अधिक फिल्मों से जुड़ाव रखने वाले शर्मा ने डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण की अपनी यात्रा पर चर्चा की। उन्होंने दस से अधिक डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाई हैं। इनमें लद्दाख और आदि कैलाश पर आधारित फिल्मों के साथ उनकी पुरस्कृत डॉक्यूमेंट्री Brazil in Banaras भी शामिल है। उन्होंने इन फिल्मों के पीछे की सोच और वास्तविक जीवन की कहानियों को पर्दे पर लाने की रचनात्मक प्रक्रिया के बारे में बताया।
कार्यक्रम में Take the Floor: The 5-Minute Window के तहत फिल्ममेकिंग के छात्र नितिश शर्मा और देवांश सिंह ने अपने रचनात्मक विचार प्रस्तुत किए। Music Chapter में विंग कमांडर (डॉ.) आर. डी. देशपांडे ने संगीत के माध्यम से कार्यक्रम में एक अलग रचनात्मक आयाम जोड़ा।
कार्यक्रम के अंत में वैभव मैत्रेय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। समन्वय की जिम्मेदारी कृश गुप्ता ने संभाली। मीडिया कवरेज में मुकेश और Ravi Sarin Film Institute की टीम का योगदान रहा। इसके बाद आयोजित नेटवर्किंग टी के दौरान प्रतिभागियों ने आपसी परिचय और संभावित पेशेवर एवं रचनात्मक सहयोग पर चर्चा की।
इस आयोजन के लिए NDFF ने Ravi Sarin Film Institute के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। संस्था ने TCOTF की शुरुआत में सहयोग देने वाले Sri Aurobindo Centre for Arts & Creativity (SACAC) तथा दिल्ली में आयोजित कार्यक्रमों के साझेदार Media & Entertainment Skills Council (MESC) और Indian Institute of Creative Skills (IICS) के योगदान को भी रेखांकित किया।
NDFF का उद्देश्य TCOTF जैसे मंचों के माध्यम से सिनेमा और कहानी कहने से जुड़े लोगों को एक साथ लाना, विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और एक सक्रिय, सहयोगी रचनात्मक समुदाय विकसित करना है।
