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“सिनेमा विज्ञान को अनुभव में बदल देता है”

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PRITHVI 2026 में विज्ञान, सिनेमा और समाज के बीच संवाद को नई दिशा; NDFF ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

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नई दिल्ली/लखनऊ. बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP), लखनऊ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘PRITHVI 2026 – द पैलियोसाइंस फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया एवं राष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान संचार संवाद’ का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। न्यू दिल्ली फिल्म फाउंडेशन (NDFF) ने इस राष्ट्रीय आयोजन में Film Partner के रूप में सहभागिता करते हुए विज्ञान, सिनेमा और समाज के बीच संवाद को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह अपनी तरह की देश की पहली राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य वृत्तचित्र फिल्मों, दृश्यात्मक कहानी कहने की कला और जनसहभागिता के माध्यम से पृथ्वी विज्ञान को व्यापक समाज तक पहुँचाना है।

तीन दिवसीय महोत्सव में जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, पुराविज्ञान, भूविज्ञान, प्राकृतिक धरोहर एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर आधारित वृत्तचित्र फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। समापन दिवस पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), विज्ञान संचार और सिनेमा की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। इसके साथ ही विविधता संरक्षण, जीवाश्म अध्ययन और समकालीन पर्यावरणीय चुनौतियों पर विशेषज्ञों द्वारा मास्टरक्लास एवं संवाद सत्र भी आयोजित किए गए।

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महोत्सव का प्रमुख आकर्षण “जनसहभागिता के लिए विज्ञान संचार : मीडिया, अकादमिक जगत और सिनेमा का संवाद” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय पैनल चर्चा रही, जिसका संचालन न्यू दिल्ली फिल्म फाउंडेशन के संस्थापक एवं महासचिव आशीष के. सिंह ने किया। चर्चा में वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, मीडिया विशेषज्ञों और फिल्मकारों ने इस बात पर विचार किया कि वैज्ञानिक विषयों को समाज तक सरल, रोचक और प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग को कैसे मजबूत बनाया जाए।

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चर्चा की शुरुआत करते हुए आशीष के. सिंह ने कहा, “सिनेमा विज्ञान को अनुभव में बदल देता है।” उन्होंने कहा कि विज्ञान खोज करता है, शिक्षा उसे समझाती है, मीडिया उसे समाज तक पहुँचाता है, जबकि सिनेमा उसे मानवीय अनुभव और संवेदना से जोड़ देता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सार्थक सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और समाज में गंभीर संवाद को प्रोत्साहित करने का भी प्रभावी माध्यम है।

पैनल चर्चा में Er. अब्दुल रशीद भट, सुश्री प्रीति रावत कनौजिया, डॉ. अविनाश कुमार तथा डॉ. जगवीर सिंह ने अपने विचार साझा किए। सत्र की अध्यक्षता प्रो. किरण लता डंगवाल एवं डॉ. सौरभ मालवीय ने की।

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समापन समारोह की अध्यक्षता बीएसआईपी के निदेशक एवं महोत्सव निदेशक प्रो. एम.जी. ठक्कर ने की। इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी मुख्य अतिथि तथा प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं अभिनेत्री सुजाता मेहता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। महोत्सव के संयोजक डॉ. निमिष कपूर ने कहा कि फिल्में और रचनात्मक दृश्य माध्यम पृथ्वी विज्ञान को आमजन तक सरल एवं प्रभावी ढंग से पहुँचाने का सशक्त साधन हैं।

NDFF ने कहा कि PRITHVI 2026 में उसकी सहभागिता विज्ञान, शिक्षा और सिनेमा के बीच रचनात्मक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा यह सार्थक और विषयकेंद्रित सिनेमा को बढ़ावा देने की उसकी प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करता है।

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