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केदारनाथ और हेमकुंट साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी

केदारनाथ
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केदारनाथ और हेमकुंट साहिब जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए दोहरी खुशखबरी है।उत्तर भारत के इन दो सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों तक पहुंचना अब आसान होने जा रहा है। एक बार रोपवे चालू हो जाने के बाद दोनों जगहों पर 30 मिनट से भी कम समय में पहुंचा जा सकता है। हेमकुंट साहिब उत्तराखंड के चमोली जिले में समुद्र तल से 4,632 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। माना जाता है कि इस स्थान पर गुरु गोबिंद सिंह जी ने तपस्या की थी। हेमकुंट साहिब गुरुद्वारा एक खूबसूरत हिमनदी झील के किनारे स्थित है। गोबिंद घाट से लगभग 19 किमी पैदल चलकर यहां पहुंचा जा सकता है। केदारनाथ भगवान शिव का एक पवित्र मंदिर और चार धामों में से एक है। यह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में समुद्र तल से 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

बर्फ से ढके पहाड़ों से घिरे इस मंदिर तक गौरीकुंड से लगभग 16 किमी की चढ़ाई या हेलीकाप्टर सेवा द्वारा पहुंचा जा सकता है। हर साल लाखों तीर्थयात्री इन दुर्गम स्थानों की तीर्थ यात्रा करते हैं और वहां प्रार्थना करते हैं। सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर हर जगह से पूरी तरह से कट जाता है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की सहायक कंपनी नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड ने दोनों स्थानों के लिए रोपवे के निर्माण के लिए निविदाएं जारी की थीं, ताकि तीर्थयात्री साल भर आराम और सुरक्षा के साथ इन पवित्र स्थानों तक पहुंच सकें। को गोंडोला से यात्रा करें या केबल कार की खिड़कियों से खूबसूरत पहाड़ देख सकते हैं। उत्तराखंड में गौरीकुंड से केदारनाथ और गोबिंद घाट से हेमकुंट साहिब (ग्रिल) तक दो रोपवे परियोजनाओं के निर्माण के लिए जीआर इंफ्रा प्रोजेक्ट सबसे कम बोली लगाने वाले के रूप में उभरा है। दोनों परियोजनाओं को हाइब्रिड वार्षिकी मोड (एचएएम) में विकसित किया जाएगा और निर्धारित तिथि से चार साल के भीतर पूरा किया जाएगा। गंतव्य स्टेशनों पर यात्रियों के लिए फूड कोर्ट सार्वजनिक सुविधाएं होंगी।

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देहरादून। भारत में अध्यात्म की सुंदरता लुप्त हो रही है जिसे संजोने की जरूरत है, ये बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डा सुनील अंबेकर ने कही। डा अंबेकर देहरादून में विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता के रूप संबोधित कर रहे थे। डा. अंबेकर ने कहा कि भारत को जानने की जरूरत है जिसे आध्यात्म के जरिए ही जाना जा सकता है चिंता की बात ये है कि अध्यात्म की सुंदरता लुप्त हो रही है जिसे संजोने की संरक्षित करने की जरूरत है और इसके लिए अध्यात्म के लिए पुस्तके बड़ी भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों की अपनी जीवन पद्धति है लेकिन भारत की जीवन पद्धति ,भारत की जीवन शैली को अपनी संस्कृति परंपरागत तौर तरीके से रहने की है, यही हमारा व्यवहार है, उन्होंने कहा कि हमे आधुनिक होना चाहिए, अनुसंधान पर भी जाना चाहिए लेकिन नारो में बहना नही चाहिए। उन्होंने कहा कि हम तकनीक से आगे बढ़ते है, हम चांद पर भी पहुंचे है वो भी संघर्ष की यात्रा है,लेकिन हमने उतना ही संघर्ष श्री राम मंदिर के निर्माण के लिए भी किया है, हमने अपनी संस्कृति अपने सनातन को नही छोड़ना है। डा अंबेकर ने कहा कि हिंदुत्व यात्रा का वर्णन हमारे ग्रंथों में है हम सभी को साथ लेकर चलते है, हमे सभ्यता हम संस्कृति की यात्रा हिंदुत्व में ही ढूंढते है, वही सही मार्ग, समानता का मार्ग है। उन्होंने कहा कि हमारे त्यौहार समानता का व्यवहार है जो हमे जोड़ती चली जाती है। उन्होंने कहा कोई जादू नहीं था कि दुनियां ने योग को अपना लिया, योग शुद्धता का भाव लिए हुए था सब के लिए उपयोगी सबके लिए कल्याणकारी भी था ऐसे कई अनुसंधान ऐसे कई विषय है जो विश्व के कल्याणकारी होंगे और अब इसे विश्व स्वीकार कर रहा है। हमारे देश में हजारों लोगों ने राष्ट्र अराधना की है। उन्होंने कहा कि देश में कुछ लोगो को भूलने की आदत है जिन्हे जगाना जरूरी है, जो कल तक ये भूल गए थे कि श्री राम कहां पैदा हुए, हुए भी कि नहीं? आज वही स्मृतियां वापिस आ रही है, कुछ लोग भारत 1947 के बाद के भारत को मानते है लेकिन भारत का इतिहास हजारों साल पुराना है। उन्होंने कहा नया भारत नई पीढ़ी का जरूर है लेकिन इस पीढ़ी को पुराने भारत के विषय में भी बताना जरूरी है। इस अवसर पर विश्व संवाद केंद्र की पत्रिका हिमालय हुंकार के दीपावली विशेषांक का भी विमोचन किया गया। साथ ही पूर्व आईएएस सुरेंद्र सिंह पांगती की पुस्तक साक्षात आदि शक्ति : उग्रावतारा नंदा का भी विमोचन किया गई। श्री रावत ने नंदा देवी के विषय में जानकारी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मेजर जनरल शम्मी सब्बरवाल ने की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुरेंद्र मित्तल ने सभी का आभार प्रकट किया। मंच पर विश्व संवाद केंद्र के निदेशक विजय, पूर्व आईएएस सुरेंद्र पांगती, रंजीत सिंह ज्याला भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रांत मीडिया संवाद प्रमुख बलदेव पाराशर ने किया। कार्यक्रम में प्रांत प्रचारक डा शैलेंद्र, क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम, सह प्रचार प्रमुख संजय, पूर्व राज्यसभा सदस्य तरुण विजय आदि गणमानय व्यक्ति उपस्थित रहे।

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