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‘अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्‍वतंत्रता दिवस’ पर सम्मानित हुए पत्रकार और राज्य आंदोलनकारी

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देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्‍वतंत्रता दिवस प्रत्येक वर्ष ३ मई को मनाया जाता है। पत्रकारिता दिवस उन लोगों के लिए मह्त्वपूर्ण है जो देश का चौथा स्तम्भ कहलाता हैं, उसके साथ ही यह दिवस उनके लिए भी एक जिम्मेदारी तय करता है जो पत्रकारो के हितों की आवाज़ बुलंद करने का दम भरते हुये अनेक सगठन चला रहे है. ऐसे ही तमाम सगठन उत्तराखंड राज्य की राजधानी देहरादून मे भी हैं. लेकिन यह सगठन अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्‍वतंत्रता दिवस के दिन कहा थे, यह सवाल खड़ा होना लाजमी हैं. सवाल खड़ा क्यों हुआ, इसका बड़ा कारण यह है की किसी भी सगठन ने अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्‍वतंत्रता दिवस के दिन कोई भी कार्यक्रम नहीं किया, केवल शहीद स्मारक मे देहरादून व नैनीताल से प्रकाशित समाचार पत्र शहीदों को नमन के अपने रजत जयंती वर्ष को अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्‍वतंत्रता दिवस के रूप मे मनाते हुए उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन मे भाग लेते हुये आंदोलनकारियो की आवाज़ को सड़क से सदन तक पहुंचाने वाले पत्रकारो को सम्मानित किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के आयोजक एवं समाचार पत्र के सम्पादक मंगेश कुमार का कहना था की अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्‍वतंत्रता दिवस काफ़ी महत्वपूर्ण दिवस हैं इस दिन को निश्चित रूप से सभी पत्रकार सगठनों के साथ ही प्रेस क्लब को भी मनाना चाहिए था, लेकिन हो सकता हैं की उनकी कोई समस्या रहीं हो, जिस कारण कार्यक्रम आयोजित नहीं हुए। उन्होंने कहा की वह अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए यह कार्यक्रम आयोजित कर रहे है। उन्होंने बताया की वर्ष 1991 में यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र के ‘जन सूचना विभाग’ ने मिलकर इसे मनाने का निर्णय किया था। ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ ने भी ‘3 मई’ को ‘अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्‍वतंत्रता दिवस’ की घोषणा की थी।
उत्तराखंड राज्य आन्दोलन में पत्रकारों एवं छायाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका को लेकर यहां कचहरी परिसर शहीद स्मारक में “शहीदों को नमन” श्रद्धांजलि एवं गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें हवन के पश्चात् गायिका संध्या मुखर्जी द्वारा वन्देमातरम गीत के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम के आयोजक शहीदों को नमन समिति और श्री दुर्गा सोशल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित शहीदों को नमन श्रद्धांजलि एवं गोष्ठी कार्यक्रम में देश और राज्य में शहीद हुए बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए दायित्वधारी अशोक वर्मा ने कहा कि राज्य आंदोलन में पत्रकारों एवं छायाकारों की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण रही है। जिन्होंने अपनी पीठ पर डंडे भीं खाए। और उफ्फ तक न की।
पूर्व सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने राज्य आंदोलन का श्रेय पत्रकारों व आंदोलनकरियों को देते हुए कहा कि राज्य के बलिदानियों की बदौलत राज्य आंदोलन को सफलता मिली जो आज हमारे लिए स्मरणीय हैं। उनका कहना है कि राज्य की शिक्षा में इस आंदोलन को जोड़ जाना चाहिए।
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आंदोलनकारियों के विषय को गंभीरता के साथ सरकार के समक्ष रखने का आश्वासन दिया।
वहीं वरिष्ठ आंदोलनकारी जगमोहन नेगी ने कहा कि यह दुख का विषय है कि आज सरकार राज्य आन्दोलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने वाले पत्रकारों के योगदान को भुला बैठी है, सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए I वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र अन्थवाल ने कहा कि पत्रकारों ने आंदोलन में जोखिम भरी पत्रकारिता की और सरकार की गंभीरता आज भी उपेक्षा नजर आ रही है, जो कि दुर्भाग्य की बात है। वरिष्ठ पत्रकार गजेन्द्र नौटियाल ने कहा कि सरकार ऐसे पत्रकारों की सूची बनाए जिन्होंने आंदोलन में अपनी जोखिम भरी भूमिका निभाई। वरिष्ठ पत्रकार शूरवीर भंडारी ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियो के चिन्हीकरण मामले में कोई भी राजनैतिक पार्टी दूध की धुली नहीं ही जो हमारे लिए दुख की बात है। पत्रकार रविंद्रनाथ कौशिक ने भी अपने विचार व्यक्त किए और राज्य आंदोलन के दौरान के संस्मरण सुनाए। प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र कंडारी ने कहा कि राज्य आंदोलन में सबसे पहले पत्रकार और वकील कूदे, लेकिन सभी का पारदर्शी सम्मान होना चाहिए, लेकिन आज भी सरकार की चिन्हीकरण प्रक्रिया में पत्रकार उपेक्षित हो गया है।
कार्यक्रम में शहीद आंदोलनकारियों के परिजनों यशोदा रावत, प्रवीण सेमवाल, यशोदा ममगाईं, एसएस बिष्ट सम्मानित किए गए। वही वरिष्ठ प्रेस छायाकार अजय गुलाटी, मो.असद, वरिष्ठ पत्रकार और आंदोलनकारी गजेन्द्र नौटियाल, प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र अन्थवाल, भूपेंद्र कण्डारी, रविंद्र कोशिश, अनिल चटर्जी, मो. खालिद और पृथ्वी सिंह, राजेश पांडे को शॉल और पुष्प देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर शहीदों को नमन कैलेंडर का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ आंदोलनकारी जगमोहन नेगी व मंगेश कुमार ने बखूबी निभाया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दायित्वधारी अशोक वर्मा, अतिविशिष्ट अतिथि पूर्व सूचना आयुक्त योगेश भट्ट, अति विशिष्ट अतिथि शिव सेना के प्रदेश अध्यक्ष गौरव कुमार, राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल, चौपाल के संयोजक सुरेंद्र कुमार का स्वागत एवं सम्मान किया गया।
दूसरी ओर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान अपनी लेखनी और फोटो से आंदोलन को धार देने वाले वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र नेगी,भूपेंद्र कंडारी, रवींद्रनाथ कौशिक, जितेन्द्र अन्थवाल, शूरवीर सिंह भंडारी, मोहम्मद असद, अनिल चटर्जी, संदीप गोयल, मोहम्मद खालिद, इंद्रेश कोहली, सुभाष कुमार, के अलावा अन्य कई पत्रकार तथा आंदोलनकारी भी शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त तिलक राज, हरीश जोशी, गौरव खंडूरी, अवधेश पंत, हरवीर सिंह कुशवाहा, सुरेन्द्र सिंह बडोला, जगमोहन नेगी, पूरण सिंह लिंगवाल, रामलाल खंडूड़ी, केशव उनियाल, विपुल नौटियाल,हरि मेहर, गणेश डंगवाल, अरुणा थपलियाल ,धर्मपाल, मोहन खत्री, विनोद असवाल, कांग्रेस के प्रदेश सचिव परवीन टीटू त्यागी, पूर्व दायित्वधारी टीकाराम पांडे,
प्रभात डंडरियाल,प्रसिद्ध गायक अलेक्जेंडर, संध्या मुखर्जी, एडवोकेट अमरजीत, गगन दीप,राजेश प्रसाद, दिव्या प्रसाद,ऊषा रानी, नितिका, निशिता,नमन आदि को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर शहीदों को नमन करते हुए सुप्रसिद्ध गायक अलेक्जेंडर ने चिट्ठी न कोई संदेश… जाने तुम कहां चले गए …गीत की प्रस्तुति देकर भावुक किया और सभी की आंखे नम कर दी।
वरिष्ठ साहित्यकार एवं जन कवि अतुल शर्मा और गजेंद्र नौटियाल ने जनजीत गाकर मौजूद श्रोताओं के रोंगटे खड़े कर आंदोलन की याद ताजा कर दी। सुप्रसिद्ध गायक अलेक्जेंडर,संध्या मुखर्जी, वरिष्ठ आंदोलनकारी गणेश डंगवाल, क्रांति रावत , एडवोकेट दीपक जुयाल का भी सम्मान किया गया।

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